लोगों की आलोचना करने की कला - informyou.online

New Updates

test

Monday, 5 March 2018

लोगों की आलोचना करने की कला



सफल आलोचना ओं की कुंजी भाव निहित है ।

अगर आप आलोचना दूसरे व्यक्ति को निम्न बताने के लिए उसे अपमानित करने के लिएया स्वयं अपना बड़प्पन जताने के लिए ही आलोचना करते हैं, तो आपको कुछ भी प्राप्त नहीं होगा। आपको सिर्फ अपने क्रोध को उगलने से संतुष्टि और दूसरे व्यक्ति की बददुआ ही मिलेगी, क्योंकि आलोचना करवाने में किसी को मजा नहीं आता।


यदि आप सुधार में, परिणामों में, दिलचस्पी लेते हैं, तो आप आलोचना से काफी कुछ प्राप्त कर सकते हैं, बशर्ते आप सही ढंग से करें। यहाँ पर कुछ नियम हैं जो आपको बिल्कुल वही करने में मदद करेंगे।

सफल आलोचना के लिए सात आवश्यकताएँ

1. आलोचना पूर्णतया: एकांत में होनी चाहिए

कोई भी दरवाजे खुले ना हों, आवाज़ ऊँची न , कोई भी न सुन रहा हो।

2आलोचना की प्रस्तावना एक नम्रतापूर्वक शब्द या बधाई से करें।

एक मैत्रीपूर्ण वातावरण बनाएँवार को नर्म बनाएँ।
(लात मारने से पहले चूमने वाला मुहावरा अपनाएं।
3. आलोचना को व्यक्तिगत न बनाएँ - कार्य की आलोचना करें, व्यक्ति की नही

कार्य की आलोचना करें, व्यक्ति की नहीं

4. इलाज भी खुद बताएं

जवाब का मतलब है सही रास्ता। जब आप किसी व्यक्ति को यह बताते हैं कि वह क्या गलत कर रहा है, आपको उसे यह भी बताना चाहिए कि इसे सही कैसे करें।

5. सहयोग मांगे इसकी माँग न करें।
बिनती करने पर ज्यादा सहयोग मिलता है, बजाय मांग करने पर। यह एक हकीकत है।
माँग करना आखिरी रास्ता है।

6 . एक गलती की एक आलोचना

न्यायोचित आलोचना भी केवल एक बार ही उचित है।

7. आलोचना को एक मैत्रीपूर्ण वातावरण में समाप्त करें

इन शब्दों के साथ समाप्त करें, "हम मित्र हैं, हम ने अपनी समस्याओं का समाधान कर लिया है, आओ साथ-साथ काम करें और एक-दूसर की मदद करें"
इस सुर पर नहीं, "आपको बता दिया गया है, अब आप काम पर लग जाएँ।"

यह सातों नियमों में से सबसे विशिष्ट है।

No comments:

Post a Comment