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Tuesday, 6 March 2018

"लोगों को Thanks बोलने की Arts"


"लोगों को कुशलतापूर्वक धन्यवाद कसे दें"
आप यदि किसी के प्रति कृतज्ञ हैं या किसी को सहारते हैं तो सिर्फ उसकी अनुभूति काफी नहीं है। आपको यह कृतज्ञता प्रशंसा उन लोगों को प्रकट करनी चाहिए जो इसके योग्य हों।

यह इसलिए है क्योंकि मानव प्रकृति प्रशंसा और प्रशंसा करने वालों से खुश होने की है।कृतज्ञता जताई तो लोग बदले में और भी अधिक स्नेह दी।

अगर आप लोगों के प्रति कृतज्ञ हैं, और अगर आप उन लोगों को यह जानकारी दे दें कि आप कुतज्ञ हैं, तो हमेशा वे आपको अगले समय और अधिक प्रदान करेंगे। अगर आप अपनी कृतज्ञता नहीं दर्शाते हैं (चाहे आप कृतत हैं) संभावना हैं कि आपको परिणाम में थोड़ा कम प्राप्त होगा

धन्यवाद कहने की भी एक कला है।

1. जब आप कहें“आपका धन्यवाद" इसका मान रखें ।

जब आप लोगों का धन्यवाद करें तो ईमानदारी से कहें, दिल से कहें लोग परख लेते हैं कि कब आप दिल से धन्यवाद कह रहे हैं।वे तब भी समझ जाते हैं जब आप ईमानदार नहीं है।

2. धन्यवाद स्पष्ट रूप से कहें।

लोगों को धन्यवाद करते समय अस्पष्ट या धीरे न बोलेंंशब्दों का गलत उच्चारण न करें।

धन्यवाद इस तरह से कहें जैसे कि आप इसे कहने में खुश हो रहे हैं।

3. जिसे आप धन्यवाद कह रहे हैं उसकी ओर देखें।

प्रभाव और भी अधिक होता है।

जो व्यक्ति धन्यवाद करने योग्य है, देखने योग्य भी है।

4. लोगों का नाम पुकार कर धन्यवाद करें।

अपने धन्यवाद को नामों के द्वारा वैयक्तिकता प्रदान करें।

ऐसा कहने पर बहुत अंतर बनता है, "आपका धन्यवाद, मिस जोन्स",
बजाए "धन्यवाद "।

5. धन्यवाद करने के काम में मेहनत करें।

इसका मतलब है प्रशंसा करने के अवसरों को ढूंढ़ना।

आम व्यक्ति स्पष्ट कारण के लिए धन्यवाद करेगा समझदार व्यक्ति अस्पष्ट के लिए भी धन्यवाद करेगा।
ये नियम हैं तो बहुत सरल मगर मानव संबंधों में 'धन्यवाद' की कला से महत्वपूर्ण शायद ही कोई अन्य कला हो।

यह आप के पूरे जीवन के लिए एक बहुमूल्य पूंजी होगी।

जब आप धन्यवाद करते समय लोगों की तरफ देखते हैं, तो इसका

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